विश्व यात्रा पर्यटन प्रतियोगी सूची में भारत ने लगाई लम्बी छलाँग
दिनांक 4 सितम्बर 2019 को वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम द्वारा घोषित एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व यात्रा पर्यटन प्रतियोगी सूची में भारत की रैंकिंग वर्ष 2017 के 40वें स्थान से ऊपर उठकर वर्ष 2019 में 34वें स्थान पर आ गई। यह रैंकिंग वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम द्वारा प्रत्येक 2 वर्ष में एक बार जारी की जाती है। वर्ष 2015 में भारत की रैंकिंग इस सूची में 52वें स्थान पर थी। इस प्रकार पिछले 4 वर्षों के दौरान भारत ने इस रैंकिंग में 18 स्थानों की छलाँग लगाई है। एशियाई देशों में निम्न मध्य-आय श्रेणी के देशों में केवल भारत ही एक ऐसा देश है जो इस सूची में प्रथम 35 स्थानों के अंदर अपनी जगह बना पाया है। अन्यथा, इस सूची में विकसित एवं मध्य आय श्रेणी के देशों का ही वर्चस्व है। वर्ष 2019 में भारत की, 140 देशों की सूची में, प्रथम 25 प्रतिशत (35) देशों के बीच, यह सबसे लम्बी छलाँग है।
उक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, मेक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड एवं ब्राज़ील जैसे देश जो उच्च-आय श्रेणी की अर्थव्यवस्थाएँ नहीं है, में बहुमूल्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संसाधनों के होने एवं मज़बूत क़ीमत प्रतिस्पर्धा के चलते सांस्कृतिक संसाधनों एवं व्यावसायिक यात्रा के मानकों पर एकदम खरे उतरे हैं। विश्व में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की दृष्टि से स्पेन प्रथम स्थान पर रहा है। इसके बाद क्रमशः फ़्रान्स, जर्मनी, जापान एवं अमेरिका रहे हैं।
वर्ल्ड इकोनोमिक फ़ोरम द्वारा 140 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन को 4 श्रेणियों में किया गया है। ये श्रेणियाँ हैं - 1.पर्यावरण की स्थिति, 2.यात्रा एवं पर्यटन नीति एवं इसे लागू करने की स्थिति, 3.बुनियादी ढाँचा, एवं 4.प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संसाधन। इन चारों श्रेणियों में अध्ययन के लिए 14 आधार बनाए गए। इन 14 आधारों का प्रयोग कर इन समस्त 140 देशों की यात्रा एवं पर्यटन प्रतिस्पर्धा आँकी गई है।
उक्त अध्ययन में यह पाया गया कि भारत की स्थिति कुछ आधारों पर तो खरी उतरती है परंतु कुछ आधारों पर भारत को अभी बहुत अधिक सुधार करने की ज़रूरत है। जैसे, प्राकृतिक संसाधन (14वाँ स्थान) एवं सांस्कृतिक संसाधन(8वाँ स्थान), क़ीमत प्रतिस्पर्धा(13वाँ स्थान), ज़मीन एवं बंदरगाह बुनियादी ढाँचा(28वाँ स्थान), वायु अधोसंरचना(33वाँ स्थान) और अन्तर्राष्ट्रीय खुलापन (51वाँ स्थान) के आधार पर भारत की स्थिति अच्छी कही जा सकती है। साथ ही, भारत ने अपने व्यापारिक वातावरण(89वें से 39वाँ स्थान), यात्रा एवं पर्यटन नीति एवं इसके लागू करने की स्थिति(79वें से 69वाँ स्थान), अधोसंरचना में सुधार(58वें से 55वाँ स्थान) एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की तैयारी(112वें से 105वाँ स्थान) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
फिर भी, भारत को अभी भी पर्यावरण स्थिरता(128वाँ स्थान), सुरक्षा एवं बचाव (122वाँ स्थान), पर्यटक सेवा बुनियादी ढाँचा (109वाँ स्थान), स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (105वाँ स्थान), पर्यावरण में सुधार(98वाँ स्थान), यात्रा एवं पर्यटन को प्राथमिकता (94वाँ स्थान) एवं मानव संसाधन एवं श्रम बाज़ार (76वाँ स्थान), जैसे क्षेत्रों में बहुत अधिक सुधार करने की आवश्यकता है।
पर्यटन एक ऐसा उद्योग है जिसमें कम निवेश से रोज़गार के अधिक अवसर बनते हैं। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा किए गए एक आकलन के अनुसार पर्यटन पर प्रति रुपए 10 लाख के निवेश पर 47.5 रोज़गार के अवसर प्रतिपादित होते हैं जबकि कृषि एवं विनिर्माण के क्षेत्र में इसी निवेश की राशि से क्रमशः 44.7 एवं 12.6 रोज़गार के अवसर प्रतिपादित होते हैं। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2017-18 में देश में 8.11 करोड़ लोगों को पर्यटन के क्षेत्र में रोज़गार उपलब्ध कराया जा रहा था, जो कि देश में कुल रोज़गार के अवसरों का 12.38 प्रतिशत था। इस उद्योग में रोज़गार एवं विदेशी मुद्रा अर्जन की असीम सम्भावनाएँ मौजूद हैं। यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र, वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जन करने वाला क्षेत्र है। साथ ही, देश के सकल घरेलू उत्पाद में भी इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
पर्यटन उद्योग में कई प्रकार की आर्थिक गतिविधियों का समावेश रहता है। यथा, अतिथि सत्कार, परिवहन, यात्रा इंतज़ाम, होटेल आदि। इस क्षेत्र में व्यापारियों, शिल्पकारों, दस्तकारों, संगीतकारों, कलाकारों, होटेल, वेटर, कूली, परिवहन एवं टूर आपरेटर आदि को रोज़गार के अवसर प्राप्त होते हैं।
भारत में तो हम “अतिथि देवो भव” के विचारों पर चलने वाले लोग हैं। परंतु, भारत की तुलना में अन्य देशों में पर्यटकों का आवागमन अधिक है। वर्ष 2018 में सबसे अधिक पर्यटक फ़्रान्स (8.94 करोड़), स्पेन (8.28 करोड़), अमेरिका (7.96 करोड़), चीन (6.29 करोड़) एवं इटली (6.21 करोड़) में पहुँचे। जबकि भारत में केवल 1.74 करोड़ पर्यटक ही पहुँचे। पूरे विश्व में 140.1 करोड़ पर्यटकों ने विभिन्न देशों की यात्रा की। वर्ष 2018 में टर्की एवं वियतनाम ने पर्यटन में क्रमशः 21.7 प्रतिशत एवं 19.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जबकि भारत ने 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस वृधि दर को बहुत अधिक तेज़ी से बढ़ाना होगा।
भारत में आध्यात्म (योगा, ध्यान, आश्रमों में भ्रमण), मेडिकल, शिक्षा, आदि क्षेत्रों में टुरिज़म की असीम सम्भावनाएँ मौजूद हैं। एतिहासिक महत्व के कई स्थान एवं बौध धर्म, इस्लाम धर्म, सिख धर्म एवं हिन्दू धर्म के कई धार्मिक स्थलों को विकसित किया जाकर विदेशी पर्यटकों को देश में आकर्षित किया जा सकता है। भारत सरकार द्वारा भी देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उपाय किए जा रहे हैं। इनमे मुख्य हैं, स्वदेशी दर्शन योजना के अन्तर्गत 13 थिमेटिक सर्कट्स का विकास किया जाना, मेडिकल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेडिकल वीज़ा आसानी से जारी किया जाना, इनक्रेडिबल इंडिया अभियान-2 को प्रारम्भ किया जाना, सरदार वल्लभ भाई पटेल की विश्व में सबसे लम्बी 182 मीटर की स्टैचू की स्थापना किया जाना तथा होटेल एवं पर्यटन के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाना।
केंद्र सरकार के साथ साथ हम नागरिकों का भी कुछ कर्तव्य है कि देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हम भी कुछ कार्य करें। जैसे प्रत्येक नागरिक, देश में ही, एक वर्ष में कम से कम दो देशी पर्यटन स्थलों का दौरा अवश्य करे। विदेशों से आ रहे पर्यटकों के आदर सत्कार में कोई कमी न रखें ताकि वे अपने देश में जाकर भारत के सत्कार का गुणगान करे। आज करोड़ों की संख्या में भारतीय, विदेशों में रह रहे हैं। यदि प्रत्येक भारतीय यह प्रण करे की प्रतिवर्ष कम से कम 5 विदेशी पर्यटकों को भारत भ्रमण हेतु प्रेरणा देगा तो एक अनुमान के अनुसार विदेशी पर्यटकों की संख्या को एक वर्ष के अंदर ही दुगना किया जा सकता है।
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